मुख पृष्ठ Policies and Schemes स्वायत्त संस्थानों के लिए परियोजना आधारित समर्थन-राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद

स्वायत्त संस्थानों के लिए परियोजना आधारित समर्थन-राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद

Brief about the Scheme

भारत सरकार द्वारा राष्ट्री य उत्पा दकता परिषद (एनपीसी) की सोसायटीज पंजीकरण अधिनियम के तहत एक स्वादयत्त निकाय के रूप में वर्ष 1958 में स्थाऔपना की गई थी। इसका त्रिपक्षीय स्वारूप है जिसमें सरकार, उद्योग तथा श्रम को समान प्रतिनिधित्व प्राप्त है। केंद्रीय वाणिज्यक एवं उद्योग मंत्री इस परिषद के अध्य,क्ष हैं तथा शासकीय निकाय के अध्यधक्ष सचिव, औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग हैं।

इस परिषद के मुख्य उद्देश्यं अर्थव्यपवस्थाध के सभी क्षेत्रों में उत्पाबदकता की जानकारी बढ़ाना, संकल्पषनाओं तथा उत्पाददकता तकनीकों का प्रदर्शन करना है। एनपीसी अपने ग्राहकों के लाभ के लिए विभिन्नद उत्पातदकता संबंधी विषयों में प्रबंधन तथा प्रौद्योगिकीय परामर्श, प्रशिक्षण तथा सूचना सेवाएं प्रदान करती है। एनपीसी द्वारा किए जाने वाले विशेषीकृत उत्पाादकता कार्य हैं: प्रक्रिया प्रबंधन, परिवेश प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, ज्ञान प्रबंधन, ऊर्जा प्रबंधन, मानव संसाधन प्रबंधन, कृषि-व्यआवसाय प्रौद्योगिकी प्रबंधन आदि।

प्रदत्त् अधिदेश के अनुसार, एनपीसी पांच से अधिक दशकों से, उत्पालदकता संवर्धन सेवाओं पर केंद्रित अग्रणी प्रयास कर रही है। इन्हेंर देश भर के उद्यमों तथा उद्यमियों के बीच अनेक परामर्शी, प्रशिक्षण तथा प्रेरक अग्रणी कार्यकलापों के जरिए पूरा किया जाता है। इन अभियानों का विशिष्टर उद्देश्यण लोगों के बेहतर जीवन यापन के लिए व्यिक्ति।यों तथा उद्यमों की उत्पा्दकता और प्रतिस्पणर्धात्मबकता बढ़ाना है। इन अग्रणी प्रयासों के विभिन्नद स्तारों पर प्रत्य क्ष परिणाम रहे हैं। एनपीसी की प्राथमिकता, समावेशी उत्पांदकता जागरूकता सुविधा प्रदान करने के उद्देश्यक वाले देशभर के उद्यमों तथा उद्यमियों के लिए जमीनी स्ततर तक उत्पाजदकता संवर्धन पहलों का विस्ता र करने की है।

एनपीसी की वर्तमान प्राथमिकता, अर्थव्यतवस्था् के सभी क्षेत्रों में क्रियान्विऔत उत्पारदकता सुधार कार्यों को सुदृढ़ करना है। एनपीसी का विशेष फोकस, अब तक शामिल नहीं किए गए क्षेत्रों जैसे नवप्रयोग, ग्रीन हाउस गैस उत्स र्जन कमी, सूक्ष्म , लघु एवं मध्ययम उद्यम (एमएसएमई) पर है जिससे उत्पा दकता अभियान को गति मिलेगी तथा लोगों का जीवन बेहतर होगा। इससे उद्यमों, मानव संसाधनों की कार्यक्षमता तथा कार्यनिष्पाोदन में निश्चितत रूप से वृद्धि होगी तथा राष्ट्री य संसाधनों का और अधिक उत्पाकदक तरीके से इस्ते माल करने में सहायता मिलेगी।

  1. कृषि आधारित उद्योगों के लिए उत्पा दकता मापन एवं उत्पा दकता मानदण्डों का विकास।

उद्देश्यक: मुख्य् उद्देश्य पांच प्रमुख चिह्नत उद्योगों, अर्थात चावल मिल, आटा मिल, दाल मिल, डेयरी प्रोसेसिंग तथा पेय, में कार्योन्मु खी उत्पाोदकता अभियान कार्यक्रम के जरिए कृषि आधारित उद्योगों में एक अभियान के रूप में उत्पा दकता को प्रोत्सानहित तथा प्रचारित करना है। निम्निलिखित विशिष्ट उद्देश्योंर के जरिए उत्पाादों की गुणवत्तान बढ़ाने तथा कम उत्पा द लागत के साथ ग्राहकों की संतुष्टिट के लिए व्‍यवस्था सरलीकरण, मानव दखल में कमी, मूल्ये संवर्धन, कार्य परिवेश सुधार, ग्राहकोन्मुयखीकरण, सतत सेवा बैंचमार्किंग सहित उत्पा दकता मापन तथा उत्पा दकता मानदण्डु विकास के माध्योम से कार्यनिष्पापदन की परिकल्पिना की गई है :

  • कृषि आधारित उद्योगों हेतु मूल्या श्रृंखला के विभिन्न स्तारों पर उत्पा दकता संबंधी निष्पा्दन का मूल्यांधकन करना।

  • उच्च उत्पा्दकता निष्पाादन प्राप्तं करने में कृषि आधारित उद्योगों को बाधित करने वाली बाधाओं की पहचान करना।

  • पांच प्रमुख कृषि आधारित उद्योगों के लिए सांकेतिक उत्पा्दकता मानदण्डों की व्य वस्थाव करना।

  • उच्च उत्पादकता निष्पािदन के संबंध में बाधाओं को दूर करने के लिए उपायों संबंधी सुझाव देना।

  1. भारत में 5 ऊर्जा सघन उद्योग क्षेत्रों, अर्थात (i) सीमेंट (ii) लुग्दी तथा कागज (iii) लोहा तथा इस्पाकत (iv) रसायन तथा (v) ताप विद्युत केंद्रों में ग्रीन हाउस गैस उत्सजर्जन कमी के लिए बेहतर प्रक्रिया नियमावली तैयार करना।

उद्देश्य : भारत को सतत रूप से कम-कार्बन पथ पर अग्रसर करने के लिए उपर्युक्त पांच प्रमुख क्षेत्रों में भारत के ग्रीन हाउस गैस उत्सपर्जन में कमी लाने में स्रोतों तथा प्रवृत्ति यों का निर्धारण करना; महत्वरपूर्ण उत्स्र्जन में कमी हेतु अपेक्षित क्षमता वाली वर्तमान स्थिपति व प्रौद्योगिकियों को रेखांकित करना और आवश्यरक निवेश एवं वित्तष-पोषण संबंधी अनुमानों की समीक्षा करना।

  • उत्सऔर्जन कम करने में आने वाली बाधाओं तथा उन्हेंष दूर करने के संभावित तरीकों की पहचान करना और मौजूदा एवं नए जलवायु वित्त‍ तंत्रों में सुधार करना।

  • सरकार द्वारा तैयार की जाने वाली उन नीतियों व निष्पा्दित किए जाने वाले कार्यों का सुझाव देना जिनसे ऊर्जा दक्षता तथा इन पांच क्षेत्रों की इकाइयों में जीएचजी कमी संबंधी कार्यों को गति मिले जिनके परिणामस्वनरूप ऊर्जा सुरक्षा में सुधार हो तथा अर्थव्यंवस्थार वृद्धि प्रोत्साकहित हो।

  1. बहुआयामी प्रभाव हेतु नवप्रयोग तथा प्रसार पर विशेष फोकस के साथ उत्पादकता संवर्धन।

उद्देश्य‍: विभिन्न उत्पातदकता सुधार साधनों तथा तकनीकों आदि के प्रकाशन, सूचना प्रसार, प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन के माध्य म से उत्पासदकता सुधार और नवप्रयोग के संबंध में लोक जागरूकता उत्पपन्नप करना तथा उसका संवर्धन ।

  • संगोष्ठि।यों, उत्पा दकता समाचारों तथा उत्पावदकता पत्रिकाओं और वेब पोर्टलों के माध्यंम से जानकारी के प्रसार सहित उत्पादकता संवर्धन सामग्रियों का विकास एवं प्रकाशन करना।

  • प्रक्रियोन्मु खी प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रमों के संचालन द्वारा सामग्री फ्लो-लागत अकाउंटिंग (एमएफसीए) के संबंध में प्रशिक्षण एवं जागरूकता उत्प्न्नी करने के माध्यउम से इस क्षेत्र में बेहतरीन प्रक्रियाओं को अपनाने के लिए उद्योगों को प्रोत्सा हित करने हेतु राष्ट्री य उत्पासदकता तथा नवाचार पुरस्कालरों के जरिए चुनिंदा उद्यमों, औद्योगिक क्षेत्रों द्वारा उत्पाउदकता सुधार तथा नवाचार संबंधी पहलों को अपनाना।

  • अपनी जानकारी को कार्यशालाओं, क्षमता निर्माण तथा सहायतापरक कार्यकलापों के माध्यपम से अन्यक उद्योगों/उद्यमों के साथ साझा करने हेतु पुरस्कार प्राप्तयकर्ताओं को प्रोत्सा‍हित करना जिसके फलस्वारूप चुनिंदा विनिर्माण क्षेत्रों की प्रतिस्प‍र्धात्मपकता सुदृढ़ हो।

  • सरकारी क्षेत्र एवं सेवा क्षेत्र उत्पादकता के मापन के संबंध में एक मॉडल विकसित करने के लिए कार्यशालाओं के आयोजन जैसे क्रियाकलापों के माध्यपम से स्वम-मूल्यां कन हेतु संगठनों को प्रोत्सायहित करना।

  • प्रिंट तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यिम से प्रचार।

  1. अम्बे्डकर उत्पासदकता संस्थाान (एआईपी), चेन्नैर का उत्कृॉष्टकता केंद्र में उन्न्यन।

    उद्देश्य‍: इस प्रस्ताशव का उद्देश्यस मौजूदा अवसंरचना सुविधाओं, हॉस्टदल, प्रशासनिक भवन, कंप्यूयटर केंद्र, लाइब्रेरी का उन्नायन करके तथा दीर्घकालिक व अल्पचकालिक पाठ्यक्रमों के संचालन तथा सीईटीईई में ऊर्जा दक्षता संबंधी प्रशिक्षण कार्यशालाओं के संचालन द्वारा उत्पािदकता अभियान पर ध्यानन केंद्रित करना तथा एआईपी, चेन्नैय की क्षमता को बढ़ाना है ताकि एआईपी, चेन्नै एक उत्कृनष्ट केंद्र तथा वित्तीथय रूप से स्वाषबलम्बीन संस्थाक बन सके।

  2. एनपीसी मुख्यालय में ऊर्जा दक्षता तथा हरित पहलों को अपनाना।

    उद्देश्यु: इस स्कीयम के उद्देश्य‍ निम्नपवत हैं :

    • एनपीसी में हरित पहलों तथा ऊर्जा दक्षता की शुरूआत करना।

    • उन्नसत ऊर्जा दक्षता पर ध्याीन देने के साथ-साथ लागत संबंधी बचत प्राप्तश करना।

    • ग्राहकों को हरित पहलों तथा ऊर्जा दक्षता में एनपीसी के दायित्व एवं सेवाओं की कार्यदक्षता और व्यऊवहार्यता की जानकारी देना।

    • संगठन की सामान्यत रूप से एक बेहतर तस्वीार प्रस्तु त करना।

  3. पिछले 5 वर्षों में बजट उपलब्धता/उपयोग (करोड़ रु. में)

    वर्ष

    योजनागत आबंटन

    योजनागत व्यय

    गैर-योजनागत आबंटन

    गैर-योजनागत व्यय

    2012-13

    -

    -

    -

    -

    2013-14

    3.95

    3.95

    -

    -

    2014-15

    8.00

    6.8135

    -

    -

    2015-16

    5.03

    5.03

    -

    -

    वर्ष 2016-17: (करोड़ रु. में)

    वर्ष

    योजनागत आबंटन

    योजनागत व्यय

    गैर-योजनागत आबंटन

    गैर-योजनागत व्यय

    तिमाही1

    5.45

    2.24

    -

    -

    तिमाही2

    1.635

    -

    -

    तिमाही3

    1.36

    -

    -

    तिमाही4

    0.215

    -

    -

  4. विगत वर्ष 2015-16 के अंत तक और वर्ष 2016-17 के दौरान वास्तविक प्रगति

    योजना

    2015-16 तक वास्तविक प्रगति

    2016-17 के दौरान वास्तविक प्रगति

    1. कृषि आधारित उद्योगों के संबंध में उत्पा दकता माप और उत्पारदकता मानक तैयार करना

    राईस मिलिंग, फ्लोर मिलिंग, दाल मिलिंग की नॉन एल्कोहालिक पेय और डेयरी प्रसंस्करण उद्योग के संबंध में 5 त्वरित अध्ययन रिपोर्ट पूरी हो गई थी।

    कृषि आधारित उद्योगों के उपर्युक्ते क्षेत्रों को बढ़ावा देने और उत्पा दकता का विस्ताषर करने के लिए विस्तृपत अध्यतयन तथा प्रमुख कार्यकलापों जैसे संयंत्र क्षमता उपयोग, श्रमशक्ति उपयोग और ऊर्जा उपयोग से संबंधित कार्रवाई और अधिप्राप्ति के लिए उत्पािदकता मानक तैयार करने का कार्य पूरा हो गया है।

    फ्लोर मिलिंग, राईस मिलिंग, दाल मिलिंग और डेयरी प्रसंस्करण उद्योग से संबंधित सेमिनार आयोजित किए गए।

    कृषि आधारित उद्योगों (डेयरी प्रसंस्कररण) के एक क्षेत्र को बढ़ावा देने और उत्पा दकता का विस्ता र करने के लिए डेयरी प्रसंस्क‍रण उद्योग संबंधी विस्तृसत अध्यंयन तथा प्रमुख संचालन जैसे कार्यकलापों संयंत्र क्षमता उपयोग, श्रमशक्ति उपयोग और ऊर्जा उपयोग से संबंधित कार्रवाई और अधिप्राप्ति के लिए उत्पािदकता मानक तैयार करना।

    एक चर्चा कार्यशाला का आयोजन किया गया।

    2. भारत में 5 ऊर्जा सघन उद्योग क्षेत्रों मंु हरित गैस उत्स र्जन में कमी करने के लिए अच्छीक प्रक्रियाओं संबंधी नियम पुस्तिका (मैनुअल) तैयार करना।

    • 5 ऊर्जा सघन उद्योग क्षेत्रों में हरित गैस उत्स5र्जन में कमी करने के लिए उत्कृष्ट प्रक्रियाओं संबंधी मैनुअल तैयार करने के लिए आंकड़ों के संग्रहण हेतु प्रश्नावली अध्य्यन और फील्डक सर्वेक्षण

    • ऊर्जा दक्षता संबंधी बेहतर प्रक्रियाओं के लिए स्पों ज आयरन क्षेत्र में कार्य चल रहा है।

    • अन्यज क्षेत्र जैसे सीमेंट, लुग्दीक एवं कागज, थर्मल पॉवर स्टेरशन, क्लोर-अलकली, प्रश्नावली सर्वेक्षण और फील्ड अध्यंयन शुरू किए जा रहे हैं।

    • प्रारंभिक सर्वेक्षणें के दौरान इकट्ठा किए गए आंकड़ों का विश्लेषण करके स्नैगपशॅाट रिपोर्टें तैयार की गई थी। संचालन समिति के साथ मध्यि अवधि समीक्षा के दौरान इन रिपोर्टों पर चर्चा की गई थी। इन क्षेत्रों के कुछ चुनिंदा उद्योगों में विस्तृरत ऊर्जा लेखा-परीक्षा की गई थी। विस्तृऊत ऊर्जा लेखा परीक्षा के दौरान, प्रारंभिक सर्वेक्षणों की कमियों पर भी विचार किया गया।

    उपलब्धर प्रौद्योगिकियों और बेहतर प्रक्रियाओं की प्राप्ति के लिए अन्यक हिस्सेखदारों जैसे कि सेवा और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं का सर्वेक्षण किया गया था।

    क्लोनर-अलकली सेक्टर (एआईपी चेन्नई)

    • रिपोर्ट की प्रस्तुति

    • मैनुअल तैयार करना और उसका मुद्रण

    • उद्योगों से उनकी राय प्राप्त करना और उनकी राय शामिल करना।

    • मैनुअल का डिजाइन तैयार करके उसका मुद्रण करना

    • कार्यशाला संबंधी अंतिम चर्चा

    लोहा एवं इस्पात सेक्टर (आरडी, कोलकाता)

    • लौहा एवं स्टील सेक्टर के लिए प्रारूप और अंतिम मैनुअल तैयार करना और समीक्षा करना।

    • अंतिम प्रसार कार्यशाला आयोजित करना।

    सीमेंट सेक्टर (आरडी, हैदराबाद)

    • कार्यशाला का आयोजन करना।

    • प्रारूप रिपोर्ट तैयार करना और समीक्षा करना तथा मैनुअल की छपाई

    लुग्दी एवं कागज सेक्टर (आरडी, बंगलुरू)

    • कुछ लुग्दी एवं कागज उद्योगों की फील्ड विजिट।

    • कार्यशाला का आयोजन करना।

    • मैनुअल को पूरा करके उसकी छपाई करवाना।

    ताप विद्युत संयंत्र सेक्टर (एचक्यू)

    • कुछ ताप विद्युत उद्योगों की फील्ड विजिट।

    • प्रारूप रिपोर्ट तैयार करना, मेनुअल पूरा करके उसकी छपाई करवाना।

    कार्यशाला का आयोजन किया जाना है।

    3. बहुआयामी प्रभाव हेतु नवीकरण तथा प्रसार पर विशेष ध्यान केन्द्रित करने के साथ-साथ उत्पादकता संवर्धन

    1. “उत्पादकता सुधार और नवाचार संबंधी जनजागरुकता को बढ़ावा देना” के अधीन एनपीसी द्वारा पूरे भारत में निम्नलिखित विषयों से संबंधित कार्यशाला, संगोष्ठी, व्याख्यान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्नक उत्पाादकता सुधार उपकरणों और तकनीकों के प्रदर्शन सहित एनपीसी आधारशिला दिवस पर एलपीसी, पीएसयू, उद्योग संघों और विभिन्नत सरकारी विभागों के सहयोग से उत्पागदकता जागरूकता सप्ताोह मनाया गयाः

      1. सतत विकास हेतु उत्पादकता एवं नवाचार (2013)

      2. उत्पादकता वृद्धि हेतु लीन प्रबंधन (2014)

      3. “मेक इन इंडियाः जीरो डीफेक्ट, जीरो इफेक्ट” (2015)

      4. उच्च उत्पादकता और सतत वृद्धि हेतु “व्यवसाय में आसानी” (2016)

    2. “ज्ञान के प्रसार सहित उत्पाकदकता संवर्धन सामग्री की व्यवस्था और उसके प्रकाशन” के तहत एनपीसी ने निम्नलिखित प्रकाशन प्रकाशित किएः

      1. “उत्पा दकता समाचार” नामक पत्रिका – नवबंर, 2016 की स्थिति के अनुसार 22 अंक

      2. “उत्पादकता” नामक शोध पत्रिका- नवंबर, 2016 की स्थिति के अनुसार 6 त्रैमासिक अंक

    3. अनुसंधान अध्ययनों के तहत एनपीसी ने निम्नलिखित 6 चुनिंदा औद्योगिक सेक्टरों के लिए अध्ययन करवाया हैः

      1. इलेक्ट्रोनिक्स एवं कम्प्यूटर हार्डवेयर

      2. चमड़ा उत्पाद

      3. लाइट इलेक्ट्रिकल माल उद्योग

      4. खेल सामान उद्योग

      5. वस्त्र एवं पोशाक

      6. खिलौना उद्योग

    4. इस क्षेत्र में बेतरीन प्रक्रियाओं को अपनाने के लिए उद्योगों को प्रोत्साहन हेतु राष्ट्रीय उत्पादकता और नवाचार पुरस्कारों के माध्यम से चुनिंदा 6 एसएमई औद्योगिक क्षेत्रों के लिए प्रत्येक वर्ष उत्पादकता सुधार और नवाचार पहचान संबंधी पहलों” के तहत एनपीसी ने निम्नलिखित का आयोजन कियाः

      1. 6 क्षेत्रों की 33 औद्योगिक इकाइयों को राष्ट्रीय उत्पादकता एवं नवाचार पुरस्कार (2013-14) के लिए उनके निष्पादन के लिए पुरस्कार देने हेतु दिल्ली में 3 अगस्त, 2016 को पुरस्कार वितरण समारोह

      2. 6 क्षेत्रों की 51 औद्योगिक इकाइयों को राष्ट्रीय उत्पादकता एवं नवाचार पुरस्कार (2014-15) के लिए उनके निष्पादन के लिए पुरस्कार देने हेतु दिल्ली में 22 फरवरी, 2016 को पुरस्कार वितरण समारोह।

    5. “अभ्यासोन्मुखी प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम का संचालन करके मेटिरियल फ्लो कोस्ट एकाउंटिंग (एमएफसीए) संबंधी पूरे देश में एसएमई के लिए प्रशिक्षण एवं जागरुकता सृजन” के तहत एनपीसी की निम्नलिखित उपलब्धियां रहीं:

      1. दो दिवसीय अभ्यासोन्मुखी प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालन- 4

      2. 48 जागरुकता कार्यक्रमों का संचालन

      3. प्रमुख रूप से एसएमई से 2500 से अधिक भागीदारों को संवेदनशील बनाया गया।

      4. अब तक लगभग 56 एमएफसीए प्रमाणित अभ्यासकर्ताओं को तैयार किया गया है।

      5. सहभागियों द्वारा निष्पादित एमएफसीए परियोजना में औसत सामग्री कचरे में 3-4% की कमी।

      6. एमएफसीए बुकलेट, मार्गनिर्देशन पुस्तकें एवं गैलरी तैयार की गई।

    6. “सार्वजनिक क्षेत्र और सेवा क्षेत्र उत्पादकता और बेंचमार्किंग मापन संबंधी मॉडल तैयार करने हेतु कार्यशालाएं” के तहत एनपीसी ने एक कार्यशाला पूरी की।

    • एनपीसी आधारशिला दिवस पर एलपीसी, पीएसयू, उद्योग संघों और विभिन्न सरकारी विभागों के सहयोग से पूरे भारत में उत्पा दकता एवं नवप्रवर्तन जागरूकता सप्तादह मनाया गया जिसमें कार्यशाला, सेमीनार, व्याेख्या न और प्रशिाक्षण कार्यक्रमों के माध्य‍म से विभिन्नर उत्पाधदकता सुधार उपकरणों और तकनीकों का प्रदर्शन शामिल है।

    • ज्ञान विस्ताकर सहित उत्पा्दकता संवर्धन सामग्री तैयार करना और प्रकाशन करना

    • उत्पा दकता समाचार द्विमासिक अंक का प्रकाशन -12

    • उत्पादकता पत्रिका के त्रैमासिक अंक का प्रकाशन -4

    • क्षेत्र में बेहतर प्रक्रियाओं को अपनाने के लिए उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु राष्ट्री य उत्पािदकता और नवप्रवर्तन अवार्ड के माध्यपम से चुनिंदा एमएसई औद्योगिक क्षेत्रों के लिए प्रतिवर्ष उत्पाएदकता सुधार और नवप्रवर्तन से संबंधित पहलों की पहचान। एमएसई के क्षेत्र की 6 निम्न लिखित विनिर्माण इकाइयों को अवार्ड दिए गए:

    1. लाइट इलेक्ट्रिकल गुड्स उद्योग

    2. खिलौना उद्योग

    3. खेल वस्तुएं उद्योग

    4. इलेक्ट्रानिक्सु और कंप्यूसटर हार्डवेयर

    5. चमड़ा उत्पातद

    6. कपड़ा और पोषाक

    • कार्याशालाएं-उपर्युक्त् सूचीबद्ध प्रत्ये क विनिर्माण खंड के लिए एक

    अभ्यास-उन्मुरखी प्रमाण-पत्र कोर्स आयोजित करके सामग्री प्रवाह-लागत लेखांकन (एमएफसीए) से संबंधित पूरे देश में एमएसई के लिए प्रशिक्षिण और जागरूकता सृजन।

    4. अम्बेडकर उत्पादकता संस्थान चेन्नई का उन्नयन करके उत्कृष्टता केन्द्र में परिवर्तित।

     

    विशेषज्ञ की पहचान, शुरूआती कार्यशाला, कार्य योजना और प्रश्नापवली तैयार करना

    हॉस्ट।ल का जीर्णोद्धार तथा ऊपर का टैंक बनाना।

    एआईपी और सीईईटीईई में अवसंरचना बनाना।

    एआईपी (सीईईटीईई) में प्रशिक्षण सुविधाओं का उन्नरयन और रख-रखाव -वास्त विक कार्य का 48 % पूरा हुआ

    दीर्घावधि और अल्पाकवधि कोर्स चलाना-4 अल्पाावधि कोर्स पूरे हुए

    व्याख्याकन खंड-निर्माण और इंटीयर्स

    एआईपी मुख्यर भवन –आंतरिक जीर्णोद्धार

    एआईपी पुस्तरकालय –उन्नियन (आंतरिक)

    अल्पा वधिक और दीर्घावधिक कोर्स

    पुस्तंकों और ई-जनरल की अधिप्राप्ति लिखतों का अंशांकन पूरा हुआ

    • लैंडस्कैकपिंग का उन्नीयन और रख-रखाव

    • कंप्यूकटर प्रणालियों का रख-रखाव

    • ऊर्जा लेखा-परीक्षा और पर्यावरण लिखितों का रख-रखाव

    • लाइसेंसों का उन्न्यन, अंशांकन एएमसी, निरीक्षण और नवीनीकरण

    • प्रचालन और रख-रखाव संबंधी कर्मचारियों का वेतन और मजदूरी

    • आरओ के प्रचालन और रख-रखाव संबंधी सामान्यन उपयोगिताएं

    • एआईसीटीई मान्य ता

    • अल्पाटवधिक और दीर्घावधिक कोर्स

    • मौजूदा पुस्तपकालय का विस्तारर

    • पुस्तकों और अन्य समयावधिक पत्रिकाओं की अधिप्राप्ति

    • पुस्तकालय का रख-रखाव

    5. एनपीसी मुख्या लय में ऊर्जा दक्षता और हरित पहलों को अपनाना

    • भवन की एसी प्रणाली के ऊर्जा दक्षता संयत्र में परिवर्तन संबंधी काम पूरा हुआ।

    • विंडो एसी की चार इकाइयों को अत्यािधुनिक बीईई 5 स्टा‍र ऊर्जा दक्ष एसी इकाइयों से प्रतिस्थासपित किया गया।

    • डबल गेज्डम विंडो पेन के माध्यपम से भवन इंसुलेशन में सुधार का काम चल रहा है।

    • सौर विद्युत उपस्करर स्थाेपित किया गया है।

    • 150 फिक्शरर्चस के लिए एलईडी लाइटिंग प्रतिस्थािपित की गई।

    • एसी प्लांसट की मूलभूत रिपेयर की गई।

    • ऊजा दक्षता उपस्क‍र और सुविधाओं की व्यावस्था् की गई-एसी संयत्र को ऊर्जा दक्षता प्रणाली में परिवर्तित किया गया। जल संग्रहण प्रणाली की व्यगवस्थाी की गई।

    • भवन के हरित प्रमाणन की तैयारी की गई।

    • एनपीसी भवन में फायर फाइटिंग और फायर अलार्म की व्यवस्था की गई।

    • छत एरिया (450 वर्ग मीटर) और फायर निकास सीढियों पर मौसम अवरोधक एस.आर.आई टाइल्स (कूल रूफ़) लगाना।

    • एनपीसी भवन में पुरानी फायर निकास सीढियों को तोड़कर भूतल से छत तक नई सीढियों का निर्माण करना।

    • प्रत्येवक कमरे में पुरानी बिजली वायरिंग के स्थांन पर नई कॉपर वायरिंग लगाना।

    • बेसमेंट के पुराने फर्श को तोड़कर कोटा स्टोुन से प्रतिस्थाटपन।

    • सभी दीवारों पर प्ला्स्ट र, जलरोधक, पेंटिंग एवं पीओपी कराना और प्रत्येंक कमरे की चारों ओर की दीवारों पर सेरेमिक टाइल्सं लगाना।

    • तालों सहित लकड़ी के सभी दरवाजों को बदलवाना या मरम्मदत कराना।

    • बेसमेंट एरिया में पुरानी ट्यूब लाइटों को बदलवाकर एलईडी लाइटें लगवाना।

    • पुरानी अलमारियों की मरम्मुत एवं पेंट करवाना।

    • छत पर उष्माग अवरोधक टाइल्स लगवाना।

    • आवश्याक अवसंरचना सहित पर्यावरणीय प्रयोगशाला और बेसमेंट का नवीकरण।

    • परिसर में हरियाली की व्यकवस्थाा करना।

    • कूड़े के अंतरिम भंडारण हेतु स्था न का निर्माण करवाना।

    • अग्नि जल भंडारण टैंक की सफाई एवं मरम्मरत कराना।

    कार्यान्व यन एजेंसी

    उपरोक्त् योजना की कार्यान्व यन एजेंसी राष्ट्रीऊय उत्पा दकता परिषद (एनपीसी) है।

    निगरानी एवं समीक्षा प्रणाली:

    एनपीसी द्वारा अभी तक हुई प्रगति की वास्तरविक प्रगति रिपोर्ट सहित निर्धारित प्रपत्र में उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्रस्तुतत किया जाना है। एनपीसी से उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्राप्तय होने पर ही विभाग द्वारा एनपीसी को फंड की अगली किस्तु देने पर विचार किया जाएगा।

    मूल्यांककन के निष्कतर्ष, यदि कोई हो: शून्यग

    योजना संबंधी दिशा-निर्देश:

    एनपीसी द्वारा उपरोक्तह योजनाओं को ‘स्वा।यत्तय निकायों को परियोजना आधारित सहायता’ शीर्ष के अंतर्गत कार्यान्वित किया गया है और इस शीर्ष के अंतर्गत सभी योजनाओं के लिए योजना दिशा-निर्देशों को सार्वजनिक किया गया है जो कि अनुबंध-। पर संलग्न है।


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