मुख पृष्ठ हमारे बारे में संगठन संरचना स्वायत्त संस्थान भारतीय रबड विनिर्माता अनुसंधान संघ

भारतीय रबड विनिर्माता अनुसंधान संघ

औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था भारतीय रबड़ निर्माता अनुसंधान संघ (आईआरएमआरए), ठाणे रबड़ एवं संबंधित उत्पादों में आधारभूत एवं अनुप्रयुक्त अनुसंधान हेतु समर्पित है। इसका मुख्य उद्देश्य रबड़ उद्योग को भारतीय रबड़ उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता पर खरा उतरने के लिए उत्पाद विकास, परीक्षण एवं कार्मिकों की संख्या में वृद्धि करने में सहयोग करना है । आईआरएमआरए का प्रशासन एक शासी परिषद द्वारा किया जाता है जिसमें रबड़ उद्योग, केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार के सदस्य होते हैं । 1959 में स्थापित किए गए आईआरएमआरए ने गैर-टायर क्षेत्र में और टायर क्षेत्र में भी सभी रबड़ उत्पादों के लिए अनुसंधान व विकास एवं परीक्षण हेतु आवश्यक अवसंरचना सृजित की है ।

आईआरएमआरए को योजनागत सहायता

XIवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान आईआरएमआरए द्वारा तीन परियोजनाओं नामत: (i) टायर अनुसंधान एवं परीक्षण हेतु उत्कृष्टता के केंद्र स्थापित करना (20.25 करोड़ रुपये), (ii) मानव संसाधन विकास-उद्यमिता विकास कार्यक्रम (1.75 करोड़ रुपये) और (iii) संपर्क कार्यक्रमों (0.50 करोड़ रुपये) के कार्यान्वयन हेतु औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग के अंतर्गत एकीकृत स्कीम “स्वायत्त निकायों को परियोजना आधारित सहायता” के तहत 22.50 करोड़ रुपये की योजनागत सहायता अनुमोदित की गई थी । उपर्युक्त परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए आईआरएमआरए को 22.42 करोड़ रुपये की योजनागत सहायता जारी की गई है ।

प्रमुख क्रियाकलाप

  • टायर अनुसंधान एवं परीक्षण के लिए उत्कृष्टता के केंद्र स्थापित करना
  • आईआरएमआरए ने टायर अनुसंधान के अतिरिक्त टायर परीक्षण केंद्र स्थापित किया है । यह केंद्र टायर अनुसंधान और परीक्षण के लिए आवश्यक मशीनों और उपकरणों जैसे यात्रीकार, ट्रक/बस के टायरों और दुपहिया/तिपहिया वाहनों के लिए मजबूती परीक्षण मशीन ,सार्वभौम परीक्षण मशीन (यूटीएम), शेरियोग्राफी, नॉएज़ वाइब्रेशन हार्शनेस (एनवीएच) और डायनेमिक ग्रोथ मशीन से सुसज्जित है । टायर परीक्षण केंद्र फरवरी, 2010 से कार्य कर रहा है । इससे देशी और विदेशी, दोनों निर्माताओं से उपभोक्ताओं के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले टायर प्राप्त करने में सहायता मिलेगी । यह केंद्र बीआईएस को लाइसेंस जारी करने आदि के उद्देश्य से टायरों का परीक्षण करने में सक्षम बना रहा है । अब तक विभिन्न निर्माताओं से टायरों के लगभग 750 आकारों का परीक्षण किया गया है ।

  • मानव संसाधन विकास-उद्यमिता विकास कार्यक्रम:-
  • आईआरएमआरए ने रबड़ प्रौद्योगिकी में अल्पावधि एवं दीर्घावधि प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित करने के लिए छात्रावासों, कक्षाओं, प्रशिक्षण सहायक सामग्री आदि जैसी अवसंरचना सुविधाएं सृजित की हैं । इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य भारतीय रबड़ उद्योग को अच्छी प्रकार से प्रशिक्षित कार्मिक उपलब्ध करा कर इसे सुदृढ़ बनाना है। रबड़ उद्योग के लिए प्रशिक्षित कार्मिकों की आपूर्ति और मांग के बीच अंतर को समाप्त करने पर अधिक जोर दिया जाता है। 2011-12 के दौरान 12 अल्पावधि तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये गए थे और चालू वित्तीय वर्ष (2012-13) के दौरान अब तक 4 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

  • संपर्क कार्यक्रम:

संपर्क कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रबड़ क्षेत्र में जानकारी का प्रसार करना और सबसे अधिक यहां के कार्य को विश्व के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों से जोड़ना है । आईआरएमआरए ने रबड़ प्रौद्योगिकी पर 20 मॉड्यूल विकसित किए हैं और उन्हें उद्योग से जुड़े लोगों को उपलब्ध कराने के लिए उनकी वेबसाइटों अपलोड किया गया है । 2011-12 के दौरान नासिक, बड़ौदा, चेन्नई में 5 कार्यशालाएं आयोजित की गई थीं। अंतर्राष्ट्रीय शहर - बैंकॉक में भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। इसी प्रकार के कार्यक्रम 2012-13 के दौरान हैदराबाद, चंडीगढ, पुणे, नोएडा, अहमदाबाद और बंगलुरु में आयोजित किए जाने हैं ।.. और अधिक

  • वार्षिक रिपोर्ट 2016-17 (8.69 MB)
  • वार्षिक रिपोर्ट 2015-16 (3.75 MB)
  • वार्षिक रिपोर्ट 2014-15 (11.3 MB)