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तकनीकी सलाहकार का कार्यालय

कार्यालय का प्रमुख तकनीकी सलाहकार (बॉयलर) है, तकनीकी सलाहकार (बॉयलर) निम्नलिखित कार्य करता हैः

  • भारतीय बॉयलर अधिनियम, १९२३ के प्रशासन तथा उसके अधीन बनाए गए भारतीय बॉयलर विनियमों को लागू करने संबंधी मामलों पर केंद्र सरकार को सलाह देना,
  • उन मामलों, विषयों के संबंध में कार्रवाई करना जिनमें, भारतीय बॉयलर अधिनियम १९२३ के उपबंधों को लागू करने हेतु केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को निर्देश दिया जाना,
  • राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों के मुख्य बॉयलर निरीक्षकों को निरीक्षण, सामग्री जांच और अविनाशक जांच, जिससे एक्सरे, रेडियो आइसोटोप, अल्ट्रासोनिक वेब, आदि शामिल हैं सहित सभी कठिन मामलों में सलाह देना,
  • बॉयलरों के विनिर्माताओं, प्रयोगकर्ताओं और अन्य संबद्घ लोगों की समस्याओं पर कार्रवाही करना तथा आवश्यक सलाह और मार्गदर्शन प्रदान करना,
  • विनियमों में संशोधन करने से संबंधित प्रस्तावों की जांच करना, जिनके अंतर्गत ड्राईंग, डिजाइन और केंद्रीय बॉयलर बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत की जाने वाली संगणनाएं और विनिर्दिष्टियां शामिल हैं ।
  • बॉयलरों की सामग्री, डिजाइन और निर्माण के मानक तय करने संबंधी तथा बॉयलरों के निरीक्षण और जांच को विनियमित करने संबंधी विनियम बनाने तथा उनमें संशोधन करने से संबंधित कार्य देखना,
  • भारतीय बॉयलर विनियम १९५० के प्रावधानों की व्याख्या करना
  • भारतीय बॉयलर विनियमावली, १९५० को संरेखित एवं अनुरूप बनाने संबंधी कार्य की निगरानी करना,
  • राज्य सरकारों/संघ शासित क्षेत्र प्रशासनों -ारा गठित अपील प्राधिकरण के आदेशों के संशोधन से संबंधित मामलों को निपटाना
  • केन्द्रीय बॉयलर बोर्ड की सभी तकनीकी उपसमितियों की बैठकें आयोजित करना, जहां तकनीकी सलाहाकर (बॉयलर) अध्यक्षता करते हों
  • भारतीय बॉयलर अधिनियम के विभिन्न मामलों पर कार्यवाही करना जैसेकि विभिन्न राज्यों में अधिनियम के कार्यक्रम पर वार्षिक रिपोर्ट की जांच, दुर्घटना रिपोर्टों की जांच उपकरणों को परीक्षण हेतु आयात लाइसेंस के आवेदनों की जांच । बॉयलरों और उनके घटकों की सुरक्षा व गुणवत्ता पर समझौता किए बिना स्टील विनिर्माताओं, फाउंड्री, फोर्ज, टयूब विनिर्माता के तौर पर विभिन्न फर्मों के गुणवत्ता प्रसंधन प्रणाली तथा उत्पादन सुविधाओं का मूल्यांकन ।
  • बॉयलरों तथा अनफायर्ड प्रेसर वेसल पर कानून की व्यापक समीक्षा समिति, १३ मई, १९९४ को राज्य सभा में भारतीय बॉयलर अधिनियम, १९२३ में संशोधन हेतु एक विधेयक, नामतः भारतीय बॉयलर (संशोधन) अधिनियम, १९९४ पेश किया गया था । यह विधेयक विभाग संबंधी संसदीय स्थाई समिति को भेजा गया था । रिपोर्ट की टिप्पणियों / सिफारिशों के आधार पर, विधेयक के सरकारी संशोधन मंत्रिमंडल से अनुमोदित कराए गए ।

    बॉयलरों का सर्वेक्षण अखिल भारतीय स्तर पर आरंभ किया गया था और दक्ष बॉयलर परिचालन एवं रखरखाव पर एक दिवसीय कार्यशालाएं निरंतर चलाई जा रही हैं ताकि बॉयलर मालिकों को अपने कार्यशील बायलरों की दक्षता को आदेश तक बानाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों से उन्हें परिचित कराया जा सके। यह कार्य राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद्‌ के जरिए किया जा रहा है ताकि ऊर्जा संरक्षण के उपायों को लोकप्रिय बनाया जा सके।

    केंद्रीय बायलर बोर्ड

    भारतीय बॉयलर अधिनियम, १९२३ (१९२३ का ५) की धारा २७क के अधीन गठित केंद्रीय बायलर बोर्ड, बायलरों बोर्ड की सामग्री उनके डिजाइन, उनके निर्माण तथा साथ ही उनका पंजीकरण और निरीक्षण करने के लिए मानक निर्धारित करने हेतु विनियम बनाने का कार्य करता है । इस बोर्ड में केन्द्रीय और राज्य सरकारों केंद्रशासित क्षेत्रों, भारतीय मानक ब्यूरो, कोयला उद्योग, बॉयलर विनिर्माण उद्योग, बायलर सहायक सामग्री उद्योग, इस्पात विनिर्माता बायलर उपयोगकर्ता तथा बायलर उद्योग से संबंधित अन्य पणधारियों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं ।

    औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग के सचिव बोर्ड के पदेन अध्यक्ष हैं और तकनीकी सलाहकार (बॉयलर) बोर्ड के पदेन सदस्यसचिव हैं ।

    यह बोर्ड प्रयोगकर्ताओं और निर्माताओं, दोनों की समस्याओं का निपटान करता है और देश में बॉयलर विनिर्माणकारी एककों के उचित विकास के लिए नीति संबंधी निर्णय लेता है । बोर्ड विश्वभर में बॉयलर उद्योग में हो रही नवीनतम प्रगतियों को समाविष्ट करते हुए भारतीय बॉयलर विनियम तैयार करता है । देश में ५०० मेगावाट के अति संवेदनशील दबाव वाले बॉयलर एकक खुलने से बोर्ड की जिम्मेदारियां भी बढ़ गई है ।

    बोर्ड, इसकी स्थायी उपसमिति और तदर्थ समितियों ने ४१ तकनीकी मामलों पर विचार कर लिया था, जो अधिकांशतः भारतीयी बॉयलर विनियमावली, १९५० और ४० मान्यता मामलों से संबंधित थे । बोर्ड के निर्णयों के आधार पर, भारतीय बॉयलर विनियमावली, १९५० के विभिन्न प्रावधानों में १४ संशोधन प्रस्थापित किए गए । इसके अलावा, वर्ष की शेष अवधि के दौरान, १४ विनियमों में संशोधन पूर्व प्रकाशित करने तथा २ विनियम प्रस्थापित करने की आशा है ।