dipp
Skip Navigation Links
होम
हमारे बारे में
नीतियां और योजनाएं
अधिनियम और नियम
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
निवेशकों के लिए
प्रकाशन
सूचना का अधिकार
समझौता ज्ञापन
बी आई पी ए
यूनिडो
डब्ल्यूआईपीओ
ए पी ओ
विश्व बैंक
Skip Navigation Links>होम>अंतर्राष्ट्रीय सहयोग>यूनिडो
  संयुक्‍त राष्‍ट्र औद्योगिक विकास संगठन (यूनिडो)  
 

प्रस्‍तावना

भारत में यूनिडो प्रचालनों से सम्‍बद्ध सभी मामलों के लिए भारत सरकार का औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग, वाणिज्‍य और उद्योग मंत्रालय एक नॉडल विभाग है।


यूनिडो की स्‍थापना वर्ष 1966 में की गई थी तथा वर्ष 1985 में यह अनन्‍य रूप से औद्योगिक विकास कार्यों को देखने वाली संयुक्‍त राष्‍ट्र की एक विशेषीकृत एजेंसी बन गया। यह अपने संसाधनों तथा विशेषज्ञता को मुख्‍य रूप से विकासशील देशों को सहायता प्रदान करने तथा सतत औद्योगिक विकास प्राप्‍त करने के लिए प्रयास कर रही अर्थव्‍यवस्‍थाओं को सहायता प्रदान करने पर केंद्रित करता है। एक तकनीकी सहयोगी एजेंसी के रूप में, यह विषय वस्‍तु संबंधी प्राथमिकताओं पर विशेष रूप से ध्‍यान केन्द्रित करते हुए कार्यक्रमों को डिजाइन और कार्यान्वित करता है, जिसका सीधा संबंध वैश्विक विकास प्राथमिकताओं से होता है। विषय वस्‍तु संबंधी विकास प्राथमिकताओं से यूनिडो कुछ मुख्‍य यू.एन मिलेनियम विकास लक्ष्‍यों का समाधान करता है। वर्तमान में यूनिडो के 170 सदस्य देश हैं तथा इसका मुख्‍यालय आस्ट्रिया के वियाना में स्थित है।

यूनिडो का अध्‍यक्ष एक महानिदेशक होता है जिसका चुनाव यूनिडो की जनरल कांफ्रेंस द्वारा चार वर्ष की कार्यवधि के लिए होता है। जून, 2013 में जनरल कान्‍फ्रेंस के विशेष सत्र के दौरान चीन गणराज्‍य के श्री ली योंग को यूनिडो का नया महानिदेशक चुना गया था। श्री योंग ने जयपुर में भागीदारी सम्मेलन 2015 में भाग लेने के लिए14-17 जनवरी 2015 को भारत का राजकीय दौरा किया तथा नई दिल्ली में 14 जनवरी 2015 को सचिव श्री अमिताभ कांत के साथ बैठक की एवं मेक इन इंडिया और भारत से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की। सचिव, डीआईपीपी ने वियना में जून 2015 में औद्योगिक विकास बोर्ड के 43 वें सत्र में भाग लिया।

नीति निर्धारक अंग:

यूनिडो के मुख्‍य नीति निर्धारक अंग जनरल कांफ्रेंस, औद्योगिक विकास बोर्ड तथा कार्यक्रम तथा बजट समिति होते हैं। भारत इन सभी तीन अंगों का सदस्‍य है।


जनरल कांफ्रेंस (जी.सी):

जनरल कांफ्रेंस संगठन के मार्गदर्शी सिद्धांतों एवं नीतियों का निर्धारण करता है तथा यूनिडो के बजट तथा कार्य संबंधी कार्यक्रमों को अनुमोदित करता है। प्रत्‍येक चार वर्ष के लिए जनरल कांफ्रेंस महानिदेशक की नियुक्ति करती है। यह औद्योगिक विकास बोर्ड तथा कार्यक्रम और बजट समिति के सदस्‍यों का चुनाव भी करती है। समिति की प्रत्‍येक दो वर्ष में बैठकें होती हैं।

यूनिडो की 16वीं आम सभा वियना अन्तर्राष्ट्रीय केन्द्र, ऑस्ट्रिया में 30 नवम्बर – 4 दिसंबर के दौरान आयोजित हुई थी। आम सभा महत्वकांक्षी विषय “साझा सम्पन्नता के लिए सतत औद्योगिकरण” पर आयोजित हुई। आम सभा में, देशों को औद्योगिक विकास बोर्ड (आईडीबी) और कार्यक्रम एवं बजट समिति (पीबीसी) के सदस्यों के रूप में क्रमशः चार वर्ष और दो वर्ष के लिए चुना जाता है। भारत ने कार्यक्रम एवं बजट समिति (पीबीसी) की सदस्यता बनाये रखी।

औद्योगिक विकास बोर्ड (आई.डी.बी):

औद्योगिक विकास बोर्ड के 53 सदस्‍य हैं जिनका चुनाव क्रमावर्ती आधार पर चार वर्ष की कार्यवधि के लिए किया जाता है। यह बोर्ड कार्य संबंधी कार्यक्रम के कार्यान्वयन, नियमित तथा प्रचालनात्‍मक बजटों की समीक्षा करता है, नीति संबंधी मामलों पर जनरल कांफ्रेंस के लिए सिफारिशें करता है जिसमें महानिदेशक की नियुक्ति का कार्य भी सम्मिलित है। बोर्ड की बैठक वर्ष में एक बार होती है।

कार्यक्रम तथा बजट समिति (पीबीसी):

समिति के 27 सदस्‍य होते हैं जिनका चयन दो वर्ष की कार्यावधि के लिए किया जाता है । यह बोर्ड का एक सहायक अंग है, जो कार्य संबंधी कार्यक्रम,बजट तथा अन्‍य वित्‍तीय मामलों की तैयारी तथा जांच करने में सहायता मुहैया कराती है। समिति की बैठक वर्ष में एक बार होती है।

भारत-यूनिडो:

भारत यूनिडो का एक संस्‍थापक सदस्‍य है। यह यूनिडो के कार्यक्रमों का प्राप्‍तकर्ता तथा अंशदाता दोनों ही है। भारत यूनिडो के नियमित बजट में अंशदान देता है, जिसकी वर्तमान राशि 0.8 मिलियन यूरो(6.8 करोड़ रूपए) वार्षिक है। इसके अलावा, भारत यूनिडो की औद्योगिक विकास निधि (आईडीएफ) के लिए 1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर (7.44 करोड़ रुपए) वार्षिक राशि का स्‍वैच्छिक अंशदान भी देता है। ये दोनों अंशदान गैर-योजना प्रावधान से किए जाते हैं। इस अंशदान के दो घटक हैं;

क) 0.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर का सामान्‍य प्रयोजन घटक, जिसका यूनिडो द्वारा विकासशील देशों में अपने तकनीकी सहयोग संबंधी कार्यकलापों के लिए इस्‍तेमाल किया जाता है।

ख) 1.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एक विशेष प्रयोजन घटक, जिसका इस्‍तेमाल भारत में परियोजनाओं के कार्यान्‍वयन हेतु किया जाता है।

भारत में यूनिडो का क्षेत्रीय कार्यालय:

साऊथ एशिया के लिए यूनिडो के क्षेत्रीय कार्यालय की स्‍थापना 1 जनवरी, 2000 को नई दिल्‍ली में की गई, जिसके अंतर्गत सात देश – भारत, बंगला देश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान , मालदीव तथा अफगानिस्‍तान आते हैं- तथा यह ज्ञान, सूचना,कौशल तथा प्रौद्योगिकी को जुटाने के लिए एक केंद्रीय बिन्‍दु के रूप में कार्य करता है, ताकि सर्वोत्‍तम प्रथाओं और दृष्टिकोणों को लागू करके क्षेत्र की सामान्‍य समस्‍याओं का समाधान करने के लिए उत्‍पादक रोजगार को प्रोत्‍साहित किया जा सके।

साऊथ एशिया क्षेत्र में यूनिडो की तकनीकी सहयोग सेवाओं की सुपुर्दगी के मुख्‍य कारक हैं- राष्‍ट्रीय नीति प्राथमिकताओं तथा विकास संबंधी कार्यनीतियों से सामंजस्‍य बिठाते हुए अपने क्रियाकलापों पर ध्‍यान केंद्रित करना, दानदाताओं के साथ एक मजबूत तथा दीर्घकालीन सहभागिता का निर्माण करना, इस क्षेत्र में यूनिडो की दृश्‍यता त‍था छवि को बढ़ाना और अपनी सहायता को इस ढंग से केंद्रित करना कि अंतर्राष्‍ट्रीय विकास लक्ष्‍य विशेषत: यू एन मिलेनियम विकास के गरीबी कम करने तथा सतत विकास के लिए राष्‍ट्रीय कार्यनीतियों के कार्यान्‍वयन को बढ़ावा देने के लक्ष्‍य का समाधान हो सके। भारत में यूनिडो के कार्यकलाप यूनिडो पर उपलब्‍ध हैं ।

भारत गणराज्‍य तथा यूनिडो के बीच सहयोग कंट्री कार्यक्रम – 2013-2017 :

भारत गणराज्‍य तथा यूनिडो के बीच सहयोग कंट्री कार्यक्रम पर वियाना में सितम्‍बर, 2013 को औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग के तत्कालीन सचिव तथा यूनिडो के महानिदेशक द्वारा हस्‍ताक्षर किए गए थे।

कंट्री कार्यक्रम – 2013-2017 के उद्देश्‍य तथा प्रत्‍याशित परिणाम

1. विभिन्‍न तकनीकी तथा नीतिगत साधनों और तौर-तरीकों को लागू करके और अधिक सतत तथा स्‍वच्‍छ औद्योगिक विकास करना।

2. बाजार योग्‍यता तथा प्रौद्योगिकी, कौशल निर्माण में सुधार, वित्‍त पहुंच बढा़कर तथा स्‍वदेशी उद्योगों के लिए अवसर विस्‍तार के माध्‍यम से संबंधित निजी क्षेत्र का विकास, विशेषकर एमएसएमई का विकास।

3. सतत औद्योगिक विकास के लिए संवंर्धित ज्ञान आधार की स्‍थापना।

कंट्री कार्यक्रम 2013-17 की समीक्षा की जा रही है क्योंकि कुछ नयी परियोजनाएं अभी सामने आ रही हैं और कुछ परियोजना को छोड़ दिया गया है। अब, कंट्री कार्यक्रम 2013-17 के तहत आने वाली परियोजनाओं के लिए संशोधित बजट 170.31 मिलियन अमरीकी डॉलर है जो पहले 101 मिलियन अमरीकी डॉलर था।

अन्तर्राष्ट्रीय समावेशी और सतत औद्योगिक विकास केन्द्र (आईसीआईएसआईडी)

पूर्व के यूनिडो केन्द्रों अर्थात पूर्व आईसीएएमटी और यूसीएसएसआईसी को दुरूस्त करके नये कंट्री कार्यक्रम के लिए “अन्तर्राष्ट्रीय समावेशी और सतत औद्योगिक विकास केन्द्र” (आईसीआईएसआईडी) के नाम से एक नया केन्द्र स्थापित किया है। आईसीआईएसआईडी यूनिडो का 2015-पश्च विकास एजेन्डा अर्थात समावेशी और सतत औद्योगिक विकास को प्रतिध्वनित करता है और इसका उद्देश्य भारत में बेहतर कार्य प्रणालियों और नई उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकी को लाना औऱ दक्षिण-दक्षिण सहयोग के फ्रेमवर्क में समूह आधारित विकास में भारत का अनुभव साझा करना है। नया केन्द्र चुनिंदा औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्रों में लक्षित हस्तक्षेपों को बढ़ावा देने वाला मॉडल केन्द्र होगा। अप्रैल 2015 में सचिव, डीआईपीपी औऱ यूनिडो के महानिदेशक ने आईसी-आईएसआईडी परियोजना दस्तावेज पर परस्पर हस्ताक्षर किए तथा 1 मई 2015 से नया केन्द्र शुरू हो गया। आईसी-आईएसआईडी की पहली संचालन समिति की बैठक 27 अगस्त 2015 को हुई थी। आईसी-आईएसआईडी के तहत डीआईपीपी की राय है कि चमड़ा, सीमेंट, कागज और लुग्दी बाईसिकिल और समूह विकास संबंधी पांच वरीयता वाली परियोजनाओं को प्रारंभ किया जाए। डीआईपीपी और यूनिडो ने निम्नलिखित तीन परियोजना दस्तावेजों पर परस्पर हस्ताक्षर कियेः

• कानपुर चमड़ा विकास परियोजना।

• लुग्दी और कागज क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के लिए उचित प्रौद्योगिकियों का विकास और अंगीकरण

• सीमेंट क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के लिए उचित प्रौद्योगिकियों का विकास और अंगीकरण


  ...और अधिक  
 
कॉपीराइट 2008 डीआईपीपी वेबसाइट नीतियां | अस्वीकरण |
इस वेबसाइट की सामग्री प्रकाशित है और औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग द्वारा प्रबंधित. कोई भी इस वेबसाइट के बारे में प्रश्न के लिए, कृपया संपर्क करें "वेब सूचना प्रबंधक: "

                                                                                      Best viewed Resolution 1024x768 using IE 6.0 or Mozilla2.0